Friday, April 24, 2020
Wednesday, April 15, 2020
मैं पुलिस वाला हूं
धीर वीर धैर्यवान बन
कर्तव्य पर अडिग हो
अनवरत चलता रहता हूं
बेझिझक कर्तव्य मार्ग पर
हाँ मैं पुलिसवाला हूँ
उन्मादी भीड़ के सामने
डंडा ले खड़ा रहता हूं
उनकी गोलियों को झेलने
निर्दोषों को बचाने में
रहता हूं सदा तत्पर
हाँ मैं पुलिसवाला हूँ
उपद्रवी भीड़ को रोकने में
उसे समझाने शांत करने में
अगर काम आ जाऊं मैं
नही मिलता दर्जा शहीद का
क्योकिं मैं पुलिस वाला हूँ
ना मेरा कोई मानवाधिकार हैं
न मेरा कोई अन्य अधिकार है
आगे कुआँ पीछे खाई कहावत
हम पर सटीक चरितार्थ होती है
फिर भी मैं पुलिसवाला हूँ
एक से बढ़कर एक,
गालियां देते हो हमें
पर दुख की घड़ी में
भगवान नजर हम आते हैं
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
नही करते परवाह
सर्दी गर्मी बरसात की
नही जा पाते कभी घर
होली दीवाली के त्यौहार पे
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
जब निकलते हैं जुलूस
होते हैं जब उग्र प्रदर्शन
शांति व्यवस्था बनाये रखने में
ख्याल नही रहता खाने पीने का
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
✍️साँवर कुमावत 'मऊ'✍️
कर्तव्य पर अडिग हो
अनवरत चलता रहता हूं
बेझिझक कर्तव्य मार्ग पर
हाँ मैं पुलिसवाला हूँ
उन्मादी भीड़ के सामने
डंडा ले खड़ा रहता हूं
उनकी गोलियों को झेलने
निर्दोषों को बचाने में
रहता हूं सदा तत्पर
हाँ मैं पुलिसवाला हूँ
उपद्रवी भीड़ को रोकने में
उसे समझाने शांत करने में
अगर काम आ जाऊं मैं
नही मिलता दर्जा शहीद का
क्योकिं मैं पुलिस वाला हूँ
ना मेरा कोई मानवाधिकार हैं
न मेरा कोई अन्य अधिकार है
आगे कुआँ पीछे खाई कहावत
हम पर सटीक चरितार्थ होती है
फिर भी मैं पुलिसवाला हूँ
एक से बढ़कर एक,
गालियां देते हो हमें
पर दुख की घड़ी में
भगवान नजर हम आते हैं
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
नही करते परवाह
सर्दी गर्मी बरसात की
नही जा पाते कभी घर
होली दीवाली के त्यौहार पे
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
जब निकलते हैं जुलूस
होते हैं जब उग्र प्रदर्शन
शांति व्यवस्था बनाये रखने में
ख्याल नही रहता खाने पीने का
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
✍️साँवर कुमावत 'मऊ'✍️
Tuesday, April 7, 2020
Wednesday, April 1, 2020
Sunday, March 29, 2020
म्हारो मुरधर देस
भूरा भूरा धोरियाँ, सोने जैड़ी रेत ।
धवळ अठै रो मानखो, राखे सबसूं हेत ।। 1
तीखो पड़े तावडियो, धोरां वाळा देस ।
बैठ गौरी पांगळ पर, खुसी होय हमेस ।। 2
मुरधर म्हारा देस में, धोरां रा है खेत ।
गरमी री इण टैम में, उड़ै रेत री रेत ।। 3
सोना जैड़ी रेत है, मुरधर री है शान ।
भलो अठै रौ मानखो, घणो बढ़ायो मान ।। 4
लुवां चालै जोरां री, मुरधर रै इण देस ।
नही दिखे है रुंखड़ा, कठै करां इब ऐस ।। 5
लुवां चाले जोरां री, हिड़दौ देवै चीर ।
बेगा आवो बालमा, मर जासी या हीर ।। 6
डगरौ चाले डगामग, मारुस्थल रै मायं ।
घुमण आया सैलाणी, घणी मौज कर जाय ।। 7
मुरधर म्हारा देस में, खेजड़ली री छांव ।
गैला चलता राहगीर, बैठ्या इण री छांव ।। 8
तातो तातो तावडो, मुरधर री पहचाण ।
लुवां चले जोरां री, लेवै सबका प्राण ।। 9
बालू हाळी रेत में, नही दिखे है रुंख ।
छाया भी दिखे कोन्या, पाणी गयो'र सूख ।। 10
सैलाणी भी आव के, करै है अठै ऐस ।
'साँवर मऊ' जी कैवै, पधारो म्हा'र देस ।। 11
🖋️साँवर कुमावत मऊ🖋️

धवळ अठै रो मानखो, राखे सबसूं हेत ।। 1
तीखो पड़े तावडियो, धोरां वाळा देस ।
बैठ गौरी पांगळ पर, खुसी होय हमेस ।। 2
मुरधर म्हारा देस में, धोरां रा है खेत ।
गरमी री इण टैम में, उड़ै रेत री रेत ।। 3
सोना जैड़ी रेत है, मुरधर री है शान ।
भलो अठै रौ मानखो, घणो बढ़ायो मान ।। 4
लुवां चालै जोरां री, मुरधर रै इण देस ।
नही दिखे है रुंखड़ा, कठै करां इब ऐस ।। 5
लुवां चाले जोरां री, हिड़दौ देवै चीर ।
बेगा आवो बालमा, मर जासी या हीर ।। 6
डगरौ चाले डगामग, मारुस्थल रै मायं ।
घुमण आया सैलाणी, घणी मौज कर जाय ।। 7
मुरधर म्हारा देस में, खेजड़ली री छांव ।
गैला चलता राहगीर, बैठ्या इण री छांव ।। 8
तातो तातो तावडो, मुरधर री पहचाण ।
लुवां चले जोरां री, लेवै सबका प्राण ।। 9
बालू हाळी रेत में, नही दिखे है रुंख ।
छाया भी दिखे कोन्या, पाणी गयो'र सूख ।। 10
सैलाणी भी आव के, करै है अठै ऐस ।
'साँवर मऊ' जी कैवै, पधारो म्हा'र देस ।। 11
🖋️साँवर कुमावत मऊ🖋️

Wednesday, March 25, 2020
कोरोना
पांव पसारा कोरोना ने
संकट के बादल मंडरायें
चीन से होकर आया रोग
सकल संसार अब घबराये
मचाकर आतंक चीन में
इटली को तबाह किया
क्या ईरान क्या इराक
अमेरिका भी बच न पाया
दस्तक दिया भारत में भी
कई लोग संक्रमित हुये
कइयों ने तो जान गवायी
घर इनके वीरान हुये
घबराना तुम बिल्कुल नही
हिम्मत से ही काम लो
बचाव ही उपचार हैं
इस कथन को मान लो
बार बार हाथ को धोकर
एक दूसरे से दूर रहकर
मास्क मुह पर पहनकर
इतना काम जरूर कर
हाथ कभी मिलाना नही
नमस्कार तुम करते रहना
जोखिम कभी उठाना मत
कोरोना से तुम बचना
प्रशासन की बात मानना
निर्देशो का पालन करना
थोड़े दिन घर बैठकर
कोरोना को तुम भागना
🖋️साँवर कुमावत मऊ🖋️
संकट के बादल मंडरायें
चीन से होकर आया रोग
सकल संसार अब घबराये
मचाकर आतंक चीन में
इटली को तबाह किया
क्या ईरान क्या इराक
अमेरिका भी बच न पाया
दस्तक दिया भारत में भी
कई लोग संक्रमित हुये
कइयों ने तो जान गवायी
घर इनके वीरान हुये
घबराना तुम बिल्कुल नही
हिम्मत से ही काम लो
बचाव ही उपचार हैं
इस कथन को मान लो
बार बार हाथ को धोकर
एक दूसरे से दूर रहकर
मास्क मुह पर पहनकर
इतना काम जरूर कर
हाथ कभी मिलाना नही
नमस्कार तुम करते रहना
जोखिम कभी उठाना मत
कोरोना से तुम बचना
प्रशासन की बात मानना
निर्देशो का पालन करना
थोड़े दिन घर बैठकर
कोरोना को तुम भागना
🖋️साँवर कुमावत मऊ🖋️
Tuesday, March 24, 2020
Sunday, March 22, 2020
Saturday, March 21, 2020
ये क्या हो गया
ये क्या हो गया इस शहर को
देखते ही देखते वीरान हो गया
जगमगाहट जिसकी बनी रहती थी
वो आज सूनसान हो गया ।
ये क्या हो गया इस शहर को
जो कहलाता है गुलाबी नगरी
आज बनी है बेरंग नगरी
वो चारदीवारी की चहचाहट भी
इस महामारी के आगे है हारी ।
ये क्या हो गया इस शहर को
चलते थे अनगिनत वाहन यहाँ
शोर शराबा होता था रोज
कभी ऐसा तो न था मेरा शहर
देखकर अब तो आता है रो'ज ।
ये क्या हो गया इस शहर को
भविष्य का अंजाम सोच कर
घर मे दुबक कर बैठे हैं लोग
मिलना जुलना सब बन्द हुआ
आया है ये कैसा रोग ।
ये क्या हो गया इस शहर को
देखा मैंने मेरी आँखों से
जैसे ग्रहण में डूबा हो शहर
बेजान नजर आती है गालियां
बेचारी पुलिस खड़ी है बाहर ।
ये क्या हो गया इस शहर को
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
देखते ही देखते वीरान हो गया
जगमगाहट जिसकी बनी रहती थी
वो आज सूनसान हो गया ।
ये क्या हो गया इस शहर को
जो कहलाता है गुलाबी नगरी
आज बनी है बेरंग नगरी
वो चारदीवारी की चहचाहट भी
इस महामारी के आगे है हारी ।
ये क्या हो गया इस शहर को
चलते थे अनगिनत वाहन यहाँ
शोर शराबा होता था रोज
कभी ऐसा तो न था मेरा शहर
देखकर अब तो आता है रो'ज ।
ये क्या हो गया इस शहर को
भविष्य का अंजाम सोच कर
घर मे दुबक कर बैठे हैं लोग
मिलना जुलना सब बन्द हुआ
आया है ये कैसा रोग ।
ये क्या हो गया इस शहर को
देखा मैंने मेरी आँखों से
जैसे ग्रहण में डूबा हो शहर
बेजान नजर आती है गालियां
बेचारी पुलिस खड़ी है बाहर ।
ये क्या हो गया इस शहर को
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
Friday, March 20, 2020
एक कदम विनाश की ओर
हमारी आवश्यकताओं ने
नही रखा ध्यान प्रकृति का
मिलकर हम सब ने ही
विनाश किया इस धरा का
विज्ञान के इस ज्ञान ने
विनाश लिखा इस जग का
रोज बदलता है मौसम
अब तो इस धरातल का
प्रदूषण से जहर घुला है
वसुधा के हर कण कण में
सांसो में तो कालिख बसता
प्राण कैसे अब बचता
लुप्त हुयी प्रजातियां
नमो निशां ही मिट गया
अब तो केवल तस्वीरों में
देख पाते हैं उन्हें अब
छेद हुआ है ओजोन में
बढ़ा ताप इस धरती का
आने वाले कुछ समय मे
अंजाम बुरा होगा इसका
पग पग पर फैली बीमारी
कोरोना बनी अब महामारी
अगर यही चक्र रहेगा जारी
आ जायेगी अपनी भी बारी
छेड मत इस प्रकृति को
सोच समझले अब तो मानव
माँ के समान ये पालन करती
मत बन अब तो दानव
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
नही रखा ध्यान प्रकृति का
मिलकर हम सब ने ही
विनाश किया इस धरा का
विज्ञान के इस ज्ञान ने
विनाश लिखा इस जग का
रोज बदलता है मौसम
अब तो इस धरातल का
प्रदूषण से जहर घुला है
वसुधा के हर कण कण में
सांसो में तो कालिख बसता
प्राण कैसे अब बचता
लुप्त हुयी प्रजातियां
नमो निशां ही मिट गया
अब तो केवल तस्वीरों में
देख पाते हैं उन्हें अब
छेद हुआ है ओजोन में
बढ़ा ताप इस धरती का
आने वाले कुछ समय मे
अंजाम बुरा होगा इसका
पग पग पर फैली बीमारी
कोरोना बनी अब महामारी
अगर यही चक्र रहेगा जारी
आ जायेगी अपनी भी बारी
छेड मत इस प्रकृति को
सोच समझले अब तो मानव
माँ के समान ये पालन करती
मत बन अब तो दानव
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
Wednesday, March 18, 2020
Saturday, March 7, 2020
नारी तू क्यों हारी
वेद पुराणों में हमने देखा
काल के हर खंडो में देखा
तेरी हर शक्ति का उल्लेख
तुझ में ही सृष्टि बसी
सृष्टि में ही तुम बसी
फिर भी नारी तू क्यों हारी
जब भी विपदा पड़ी जग में
अनेकों रूप करे हैं धारण
सृष्टि पर से दानवों का
किया है पल में खातमा
फिर भी नारी तू क्यों हारी
काल के हर खंड में है
तेरा इतिहास स्वर्णिम
दुष्टों के लिये दुर्गा बनी
भक्तों के लिये पार्वती
फिर भी नारी तू क्यों हारी
हर युग की तेरी कहानी है
तू त्रेता की सीता की जैसे
तू द्वापर की राधा की जैसे
तू कलयुग की मीरां की जैसे
फिर भी नारी तू क्यों हारी
जब संकट आया भारत पर
तू मरदाना वेश पहन कर
बन झांसी की रानी तूने
तलवार खूब चलायी है
नारी फिर भी तू क्यों हारी
तू प्रेम स्नेह करुणा की सागर
शक्ति भक्ति और ममता की गागर
सिमटे है तुझमे कितने ही गम
तू हर गम को हर बार संवारती
फिर भी नारी तू क्यों हारी
खुद का सम्मान बचाने को
अपना अस्तित्व बचाने को
हर बार तू खुद से लड़ती है
शर्म आँखों मे ले दृढ़ता से खड़ी
फिर भी नारी तू क्यों हारी
ये कैसा संसार तूने बनाया है
विडम्बना देखो इस संसार की
पुरुष जो तुमसे ही जन्मा
हुकुम तुम पर ही चला रहा
फिर भी नारी तू क्यों हारी
तू भावुक तू कोमल है
पर तू कमजोर नही है
तू अबला तू नादान नही
हर काम से तेरी पहचान है
फिर भी नारी तू क्यों हारी
दिखावा करने को हम तैयार है
नारी को मान सम्मान देने
वर्ष में केवल एक दिन हम
महिला दिवस मनाते हैं
कहता मऊ का साँवरा
सम्मान नारी को देना है
बंदिशों जुल्मों से आज़ाद करो
वो स्वयं अपनी अधिकारी हो
हे नारी तू बड़ी बलशाली
फिर भी नारी तू क्यों हारी
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
काल के हर खंडो में देखा
तेरी हर शक्ति का उल्लेख
तुझ में ही सृष्टि बसी
सृष्टि में ही तुम बसी
फिर भी नारी तू क्यों हारी
जब भी विपदा पड़ी जग में
अनेकों रूप करे हैं धारण
सृष्टि पर से दानवों का
किया है पल में खातमा
फिर भी नारी तू क्यों हारी
काल के हर खंड में है
तेरा इतिहास स्वर्णिम
दुष्टों के लिये दुर्गा बनी
भक्तों के लिये पार्वती
फिर भी नारी तू क्यों हारी
हर युग की तेरी कहानी है
तू त्रेता की सीता की जैसे
तू द्वापर की राधा की जैसे
तू कलयुग की मीरां की जैसे
फिर भी नारी तू क्यों हारी
जब संकट आया भारत पर
तू मरदाना वेश पहन कर
बन झांसी की रानी तूने
तलवार खूब चलायी है
नारी फिर भी तू क्यों हारी
तू प्रेम स्नेह करुणा की सागर
शक्ति भक्ति और ममता की गागर
सिमटे है तुझमे कितने ही गम
तू हर गम को हर बार संवारती
फिर भी नारी तू क्यों हारी
खुद का सम्मान बचाने को
अपना अस्तित्व बचाने को
हर बार तू खुद से लड़ती है
शर्म आँखों मे ले दृढ़ता से खड़ी
फिर भी नारी तू क्यों हारी
ये कैसा संसार तूने बनाया है
विडम्बना देखो इस संसार की
पुरुष जो तुमसे ही जन्मा
हुकुम तुम पर ही चला रहा
फिर भी नारी तू क्यों हारी
तू भावुक तू कोमल है
पर तू कमजोर नही है
तू अबला तू नादान नही
हर काम से तेरी पहचान है
फिर भी नारी तू क्यों हारी
दिखावा करने को हम तैयार है
नारी को मान सम्मान देने
वर्ष में केवल एक दिन हम
महिला दिवस मनाते हैं
कहता मऊ का साँवरा
सम्मान नारी को देना है
बंदिशों जुल्मों से आज़ाद करो
वो स्वयं अपनी अधिकारी हो
हे नारी तू बड़ी बलशाली
फिर भी नारी तू क्यों हारी
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
Friday, March 6, 2020
Thursday, March 5, 2020
Saturday, February 29, 2020
हे सांवरिया_5
मन में है बसी, बस चाह यही
कि नाम तुम्हारा उच्चारा करूँ
बिठाके तुम्हे मन मंदिर में
मनमोहनी रूप निहारा करूँ
भर के पात्र में प्रेम का जल
पद पंकज नाथ पखारा करुँ
बन प्रेम पुजारी तुम्हारा प्रभु
नित आरती भव्य उतारा करूँ
तुम अयोग्य जानकर बिसराओ मुझे
पर में ना तुम्हे कभी बिसराया करूँ
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️

Friday, February 28, 2020
हे सांवरिया_4
तेरी रहमतों से सांवरे, मेरा सब काम हो रहा है
मैं तो जरिया हूँ तेरा, इसलिए मेरा नाम हो रहा है
डगमग मेरी नाव चल रही, सहारा इसे तुम दे रहे
हैरान हैं जमाना ये देख, मंजिल इसे कैसे मिल रही
इतना तो काबिल नही था मैं, तेरा सहारा पा लिया
इस अनगढ़ वाणी से ,गुणगान तेरा गा लिया
सुख दुख की हर घड़ी में, तूने ही मुझको थामा
तुम कृष्ण बन के आये, मैं जब बना सुदामा
चाकर बन गया मैं तो तेरा, ध्यावू रोज तुम्हे ही प्यारे
नित उठ दर्शन करूँ मैं तेरे, हे श्याम सलोने मेरे प्यारे
विनती करू हे प्यारे मेरे, चरणों की धूल बनाले मुझको
जीवन नैया पार लगा दे ,अर्पण करूँ मैं जीवन तुझको
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
मैं तो जरिया हूँ तेरा, इसलिए मेरा नाम हो रहा है
डगमग मेरी नाव चल रही, सहारा इसे तुम दे रहे
हैरान हैं जमाना ये देख, मंजिल इसे कैसे मिल रही
इतना तो काबिल नही था मैं, तेरा सहारा पा लिया
इस अनगढ़ वाणी से ,गुणगान तेरा गा लिया
सुख दुख की हर घड़ी में, तूने ही मुझको थामा
तुम कृष्ण बन के आये, मैं जब बना सुदामा
चाकर बन गया मैं तो तेरा, ध्यावू रोज तुम्हे ही प्यारे
नित उठ दर्शन करूँ मैं तेरे, हे श्याम सलोने मेरे प्यारे
विनती करू हे प्यारे मेरे, चरणों की धूल बनाले मुझको
जीवन नैया पार लगा दे ,अर्पण करूँ मैं जीवन तुझको
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
Thursday, February 27, 2020
हे सांवरिया3
मेरे सांवरिया
-----------------------------------------------
मनमोहक रुप सलोनी सूरत
मन मन्दिर में बसी हैं मूरत
पद पंकज में बंधी पैजनियां
झंकृत कर दो मेरी जीवनियां
देख तुम्हारी छटां निराली
जीवन हो गया मेरा निहाली
अंत समय की यही अभिलाषा
दर्शन देकर पूरी करो ये आशा
🖋️साँवर कुमावत"मऊ"🖋️
-----------------------------------------------
मनमोहक रुप सलोनी सूरत
मन मन्दिर में बसी हैं मूरत
पद पंकज में बंधी पैजनियां
झंकृत कर दो मेरी जीवनियां
देख तुम्हारी छटां निराली
जीवन हो गया मेरा निहाली
अंत समय की यही अभिलाषा
दर्शन देकर पूरी करो ये आशा
🖋️साँवर कुमावत"मऊ"🖋️
हे सांवरिया2
sanwarkumawatmauमेरे साँवरिया💌
-----------------------------------------------
मैं दीवाना हूँ श्याम, तेरे दर्शन चाहिए ।
करूँ मैं तेरी चाकरी,ऐसा जीवन
चाहिए ।
सुबह शाम तेरा स्मरण करूँ, ऐसी यादास्त चाहिए ।
खो न जायें याद तेरी, ऐसा साथ चाहिए ।
आऊँ वृंदावन धाम मैं, ऐसा सौभाग्य चाहिए ।
इस नश्वर जगत में, तेरा साथ चाहिए ।
कुछ नही लालसा बस, तेरा नाम चाहिए ।
बस जायें सांसो में नाम तेरा, इतनी कृपा चाहिए ।
भव सागर को तारने में, तुम से मांझी चाहिए ।
साँवरो करे विनती, हर जन्म में तुम्हारे चरण चाहिए ।
-----------------------------------------------
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ' 🖋️
-----------------------------------------------
मैं दीवाना हूँ श्याम, तेरे दर्शन चाहिए ।
करूँ मैं तेरी चाकरी,ऐसा जीवन
चाहिए ।
सुबह शाम तेरा स्मरण करूँ, ऐसी यादास्त चाहिए ।
खो न जायें याद तेरी, ऐसा साथ चाहिए ।
आऊँ वृंदावन धाम मैं, ऐसा सौभाग्य चाहिए ।
इस नश्वर जगत में, तेरा साथ चाहिए ।
कुछ नही लालसा बस, तेरा नाम चाहिए ।
बस जायें सांसो में नाम तेरा, इतनी कृपा चाहिए ।
भव सागर को तारने में, तुम से मांझी चाहिए ।
साँवरो करे विनती, हर जन्म में तुम्हारे चरण चाहिए ।
-----------------------------------------------
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ' 🖋️
हे सांवरिया1
मेरे साँवरिया💌
-----------------------------------------------
राजा तू मन का है मेरा
साँस साँस अब तो है तेरी
दर्शन को तरसू हूँ तेरे
कब आओगे मेरे प्यारे
चुन चुन कर के शब्द बनाऊँ
तुमको मैं तो खूब रिझाऊँ
क्या कमी है मुझमें प्यारे
नहीं बनते हो मेरे सहारे
आकर मेरी आस जगा दो
सोया भाग जगा दो अब तो
बिन तेरे है ये जीवनियां
कब तक चलेगी हे सांवरिया
@साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
-----------------------------------------------
राजा तू मन का है मेरा
साँस साँस अब तो है तेरी
दर्शन को तरसू हूँ तेरे
कब आओगे मेरे प्यारे
चुन चुन कर के शब्द बनाऊँ
तुमको मैं तो खूब रिझाऊँ
क्या कमी है मुझमें प्यारे
नहीं बनते हो मेरे सहारे
आकर मेरी आस जगा दो
सोया भाग जगा दो अब तो
बिन तेरे है ये जीवनियां
कब तक चलेगी हे सांवरिया
@साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
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