Saturday, March 7, 2020

नारी तू क्यों हारी

वेद पुराणों में हमने देखा
काल के हर खंडो में देखा
तेरी हर शक्ति का उल्लेख
तुझ  में  ही  सृष्टि  बसी
सृष्टि  में  ही  तुम  बसी
                 फिर भी नारी तू क्यों हारी

जब भी विपदा पड़ी जग में
अनेकों रूप करे हैं धारण
सृष्टि पर से दानवों  का
किया है पल में खातमा
                 फिर भी नारी तू क्यों हारी

काल के हर खंड में है
तेरा इतिहास स्वर्णिम
दुष्टों के लिये दुर्गा बनी
भक्तों के लिये पार्वती
                 फिर भी नारी तू क्यों हारी

हर युग की तेरी कहानी है
तू त्रेता की सीता की जैसे
तू द्वापर की राधा की जैसे
तू कलयुग की मीरां की जैसे
                 फिर भी नारी तू क्यों हारी

जब संकट आया भारत पर
तू मरदाना वेश पहन कर
बन झांसी की रानी तूने
तलवार खूब चलायी है
                नारी फिर भी तू क्यों हारी

तू प्रेम स्नेह करुणा की सागर
शक्ति भक्ति और ममता की गागर
सिमटे है तुझमे कितने ही गम
तू हर गम को हर बार संवारती
                 फिर भी नारी तू क्यों हारी

खुद का सम्मान बचाने को
अपना अस्तित्व बचाने को
हर बार तू खुद से लड़ती है
शर्म आँखों मे ले दृढ़ता से खड़ी
                 फिर भी नारी तू क्यों हारी

ये कैसा संसार तूने बनाया है
विडम्बना देखो इस संसार की
पुरुष जो तुमसे ही जन्मा
हुकुम तुम पर ही चला रहा
                 फिर भी नारी तू क्यों हारी

तू भावुक तू कोमल है
पर तू कमजोर नही है
तू अबला तू नादान नही
हर काम से तेरी पहचान है
                 फिर भी नारी तू क्यों हारी

दिखावा करने को हम तैयार है
नारी को मान सम्मान देने
वर्ष में केवल एक दिन हम
महिला दिवस मनाते हैं

कहता मऊ का साँवरा
सम्मान नारी को देना है
बंदिशों जुल्मों से आज़ाद करो
वो स्वयं अपनी अधिकारी हो
हे नारी तू बड़ी बलशाली
                 फिर भी नारी तू क्यों हारी

🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️

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