बदलेगें अश्क बहारों में तेरे, कभी साँवरे के दर पर आकर तो देख ।
कहने की जुबां से जरूरत नहीं है, जरा अपना दामन फैलाकर तो देख।
निकालेगा कश्ती भंवर से तेरी, मेरे साँवरे को मांझी बना कर तो देख ।
बड़ा दयालु है मेरा साँवरा, तू कभी आजमा कर तो देख।।
🖋️साँवर कुमावत मऊ🖋️
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