Thursday, February 27, 2020

हे सांवरिया3

मेरे सांवरिया
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मनमोहक रुप सलोनी सूरत
मन मन्दिर में बसी हैं मूरत
पद पंकज में बंधी पैजनियां
झंकृत कर दो मेरी जीवनियां
देख तुम्हारी छटां निराली
जीवन हो गया मेरा निहाली
अंत समय की यही अभिलाषा
दर्शन देकर पूरी करो ये आशा

🖋️साँवर कुमावत"मऊ"🖋️

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