धीर वीर धैर्यवान बन
कर्तव्य पर अडिग हो
अनवरत चलता रहता हूं
बेझिझक कर्तव्य मार्ग पर
हाँ मैं पुलिसवाला हूँ
उन्मादी भीड़ के सामने
डंडा ले खड़ा रहता हूं
उनकी गोलियों को झेलने
निर्दोषों को बचाने में
रहता हूं सदा तत्पर
हाँ मैं पुलिसवाला हूँ
उपद्रवी भीड़ को रोकने में
उसे समझाने शांत करने में
अगर काम आ जाऊं मैं
नही मिलता दर्जा शहीद का
क्योकिं मैं पुलिस वाला हूँ
ना मेरा कोई मानवाधिकार हैं
न मेरा कोई अन्य अधिकार है
आगे कुआँ पीछे खाई कहावत
हम पर सटीक चरितार्थ होती है
फिर भी मैं पुलिसवाला हूँ
एक से बढ़कर एक,
गालियां देते हो हमें
पर दुख की घड़ी में
भगवान नजर हम आते हैं
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
नही करते परवाह
सर्दी गर्मी बरसात की
नही जा पाते कभी घर
होली दीवाली के त्यौहार पे
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
जब निकलते हैं जुलूस
होते हैं जब उग्र प्रदर्शन
शांति व्यवस्था बनाये रखने में
ख्याल नही रहता खाने पीने का
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
✍️साँवर कुमावत 'मऊ'✍️
कर्तव्य पर अडिग हो
अनवरत चलता रहता हूं
बेझिझक कर्तव्य मार्ग पर
हाँ मैं पुलिसवाला हूँ
उन्मादी भीड़ के सामने
डंडा ले खड़ा रहता हूं
उनकी गोलियों को झेलने
निर्दोषों को बचाने में
रहता हूं सदा तत्पर
हाँ मैं पुलिसवाला हूँ
उपद्रवी भीड़ को रोकने में
उसे समझाने शांत करने में
अगर काम आ जाऊं मैं
नही मिलता दर्जा शहीद का
क्योकिं मैं पुलिस वाला हूँ
ना मेरा कोई मानवाधिकार हैं
न मेरा कोई अन्य अधिकार है
आगे कुआँ पीछे खाई कहावत
हम पर सटीक चरितार्थ होती है
फिर भी मैं पुलिसवाला हूँ
एक से बढ़कर एक,
गालियां देते हो हमें
पर दुख की घड़ी में
भगवान नजर हम आते हैं
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
नही करते परवाह
सर्दी गर्मी बरसात की
नही जा पाते कभी घर
होली दीवाली के त्यौहार पे
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
जब निकलते हैं जुलूस
होते हैं जब उग्र प्रदर्शन
शांति व्यवस्था बनाये रखने में
ख्याल नही रहता खाने पीने का
क्योंकि मैं पुलिसवाला हूँ
✍️साँवर कुमावत 'मऊ'✍️
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