हमारी आवश्यकताओं ने
नही रखा ध्यान प्रकृति का
मिलकर हम सब ने ही
विनाश किया इस धरा का
विज्ञान के इस ज्ञान ने
विनाश लिखा इस जग का
रोज बदलता है मौसम
अब तो इस धरातल का
प्रदूषण से जहर घुला है
वसुधा के हर कण कण में
सांसो में तो कालिख बसता
प्राण कैसे अब बचता
लुप्त हुयी प्रजातियां
नमो निशां ही मिट गया
अब तो केवल तस्वीरों में
देख पाते हैं उन्हें अब
छेद हुआ है ओजोन में
बढ़ा ताप इस धरती का
आने वाले कुछ समय मे
अंजाम बुरा होगा इसका
पग पग पर फैली बीमारी
कोरोना बनी अब महामारी
अगर यही चक्र रहेगा जारी
आ जायेगी अपनी भी बारी
छेड मत इस प्रकृति को
सोच समझले अब तो मानव
माँ के समान ये पालन करती
मत बन अब तो दानव
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
नही रखा ध्यान प्रकृति का
मिलकर हम सब ने ही
विनाश किया इस धरा का
विज्ञान के इस ज्ञान ने
विनाश लिखा इस जग का
रोज बदलता है मौसम
अब तो इस धरातल का
प्रदूषण से जहर घुला है
वसुधा के हर कण कण में
सांसो में तो कालिख बसता
प्राण कैसे अब बचता
लुप्त हुयी प्रजातियां
नमो निशां ही मिट गया
अब तो केवल तस्वीरों में
देख पाते हैं उन्हें अब
छेद हुआ है ओजोन में
बढ़ा ताप इस धरती का
आने वाले कुछ समय मे
अंजाम बुरा होगा इसका
पग पग पर फैली बीमारी
कोरोना बनी अब महामारी
अगर यही चक्र रहेगा जारी
आ जायेगी अपनी भी बारी
छेड मत इस प्रकृति को
सोच समझले अब तो मानव
माँ के समान ये पालन करती
मत बन अब तो दानव
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️
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