Friday, March 20, 2020

एक कदम विनाश की ओर

हमारी आवश्यकताओं ने
नही रखा ध्यान प्रकृति का
मिलकर हम सब ने ही
विनाश किया इस धरा का

विज्ञान के इस ज्ञान ने
विनाश लिखा इस जग का
रोज बदलता है मौसम
अब तो इस धरातल का

प्रदूषण से जहर घुला है
वसुधा के हर कण कण में
सांसो में तो कालिख बसता
प्राण कैसे अब बचता

लुप्त हुयी प्रजातियां
नमो निशां ही मिट गया
अब तो केवल तस्वीरों में
देख पाते हैं उन्हें अब

छेद हुआ है ओजोन में
बढ़ा ताप इस धरती का
आने वाले कुछ समय मे
अंजाम बुरा होगा इसका

पग पग पर फैली बीमारी
कोरोना बनी अब महामारी
अगर यही चक्र रहेगा जारी
आ जायेगी अपनी भी बारी

छेड मत इस प्रकृति को
सोच समझले अब तो मानव
माँ के समान ये पालन करती
मत बन अब तो दानव
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️

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