Thursday, August 30, 2018

श्री कृष्ण पर दोहे

---------श्री कृष्ण पर दोहे---------
--------------------------------------------
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, लियो हरि अवतार ।
धरा पर से दुष्टो का, किया बहुत संहार ।।१।।
--------------------------------------------

लियो हरि अवतार तो, खुलगी सारी जेल ।
सभी प्रहरी सो गये, हुआ नंद से मेल ।।२।।
--------------------------------------------

हुआ नन्द से मेल तो, खुब रचाई रास ।
दौड़ी दौड़ी गोपियां, आयी हरि के पास ।।३।।
--------------------------------------------

निर्मल यमुना बह रही, मोहन खड़े है तीर ।
आ जाओ अब राधिके, मन हो रहा अधीर ।।४।।
--------------------------------------------

मधुबन में जब गूंजती, मुरली की वो तान ।
सुध बुध सारी भूल गयी, भूली जान अजान ।।५।।
--------------------------------------------

देख मनोहर रुप को , तन मन ही खिल जाय ।
कन्हैया के प्यार से, रोम रोम हर साय ।।६।।
--------------------------------------------

श्री कृष्ण ने दे दिया, गीता में उपदेश
क्षण भंगुर है जीवन, मानो यह संदेश ।।७।।
--------------------------------------------

श्याम सलोने साँवरे, जग के पालनहार ।
भव सागर से तार दो, यह कर दो उपकार ।।८।।
--------------------------------------------

इस जीवन मे लग गयी, श्याम नाम की लाग ।
श्याम श्याम रटते रहो, यही आलापों राग ।।९।।
--------------------------------------------

महाभारत के रण में, दिया सत्य का ज्ञान ।
गीता का उपदेश दे, दी असत्य को मात ।।१०।।
--------------------------------------------

गोपियों संग कृष्ण ने, बहुत रचाई रास ।।
धरती पर से कर दिया, दुष्टो का ही नाश ।।११।।
--------------------------------------------

यमुना के उस तीर पे, बहुत चराई गाय ।
बाल कृष्ण को देख कर, यशोदा दौड़ी आय ।।१२।।
--------------------------------------------

कलयुग के इस दौर में, आओ तुम घनश्याम ।
दुष्टो का संहार कर, कर दो काम तमाम ।।१३।।
--------------------------------------------

कृष्ण जिनके सारथी, कभी न आये पीर ।
द्रोपदी की लाज रखी, बढ़ा बढ़ा के चीर ।।१४।।
--------------------------------------------

साँवरे की ज्योति से, जीव लगेगा पार ।
कर ले तू गुणगान रे, ना ही होगी हार ।।१५।।
--------------------------------------------

मीराँ के तुम मोहनां, नन्द के नन्दलाल ।
"साँवर" के तुम साँवरा, कर दो माला माल ।।१६।।
--------------------------------------------

तेरे प्रेम में पड़ के, छोड़ा है घर बार ।
कहे " साँवरा" साँवरे, कर दो नैया पार ।।१७।।
--------------------------------------------
✍ साँवर कुमावत 'मऊ' ✍
--------------------------------------------

Sunday, August 26, 2018

मायड़ भासा राजस्थानी

-----मायड़ भासा रो हेलो---

**********************
मायड़ भासा थारी दुर्दशा
म्हारां सूँ देखी नीं जावे है
नेतावां तो सो रिया
कवि अलख जगावे है
-------------------------------------
चौबीस होकर भी संसद मायं
क्यूं ही नीं बोले है
अब तो दोनयूँ ओर शासन थारो
फिर क्यों अनाथ होरी है
---------------------------------------
करोड़ा लोगां री भासा
तुच्छ भासावां रै कनै
तुच्छ सी लाग'री है
शर्म कर ल्यो नेतावां अब तो
मायड़ भासा नै मान दिरा देवो
----------------------------------------
बोटा हाळा टैम में
अब तो जोर दिखाणो है
नेतावां नै हैलो मारो
अब तो मायड़ भासा ने मान दिराणौ है
----------------------------------------
😢😢😢😢😢😢😢
----------------------------------------
✍साँवर कुमावत ' मऊ'✍

Thursday, August 16, 2018

अटल बिहारी वाजपेयी

😢अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि😢
🙏पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को🙏
----------------------------------------
अटल बिहारी अटल थे, अटल किया था काम ।
परमाणु परीक्षण किया, किया देश का नाम ।।

शांत स्वभाव अटल का, दिया सभी को सम्मान ।
विपक्षी के जवाब का, नही किया अपमान ।।

भारत की वो शान थे , हिंदी का था ज्ञान ।
अंग्रेजी से सदा वो, रहते थे अनजान ।।

पद का कभी लोभ नही, दी थी कुर्सी त्याग ।
अच्छे कर्म करने से, गाते है सब राग ।।

भारत के वो रत्न थे, माँ के थे वो लाल ।
कारगिल के उस रण में, बिछा दिया था जाल ।।
----------------------------------------
✍साँवर कुमावत 'मऊ'✍
----------------------------------------
😢😢😢😢😢😢😢

Tuesday, August 14, 2018

पर्यावरण के दोहे

   पर्यावरण पच्चीसी
---------------------------------------
१
विघ्न हरण विनायक जी, देना ज्ञान अपार
पर्यावरण पर लिखता, करना बेड़ा पार
---------------------------------------
--------------------------------------
२
पर्यावरण मलिन करे, तनिक न आती लाज
रे मानव तू है बना, दैत्यों का सरताज
---------------------------------------
३
कूके कोयल बाग में, नाचे उपवन मोर
मनभावन पर्यावरण, आज बना चितचोर
----------------------------------------
४
पर्यावरण बचाइये, धरती करे पुकार
पेड़ लगाकर कीजिए, धरती का श्रृंगार
--------------------------------------
५
मशीनरी जब से बनी, जीवन का आधार
तबसे पर्यावरण की, हुई करारी हार
---------------------------------------
६
जब साल में एक दिवा, करते जय जयकार
पर्यावरण दिवस कहाँ, होगा फिर साकार
---------------------------------------
७
षट ऋतु बारह मास है, गरम शरद बरसात
साफ पर्यावरण रहे, सुबह शाम दिन रात
--------------------------------------
८
दूषित पर्यावरण से, सभी जीव बेहाल
मानव ने गंदा किया, जीना हुआ मुहाल
----------------------------------------
९
शुद्धी पर्यावरण से, शुद्ध मिलेगा अन्न
काया तरपत हो गयी, हरख जायेगा मन
--------------------------- --  ---------
१०
मलिन पर्यावरण देख, तडपता सृष्टिकार
गाँधीजी के स्वप्न को, अभी करो साकार
---------------------------------------
११
कर दे मानव जिंदगी, सब कुदरत के नाम
पेड़ों पौधों पर लिखें, प्यार भरा पैगाम
----------------------------------------
१२
तन मन धन कुर्बा करो, कुदरत के ही नाम
खूब लगाओ तरु लता, खूब लगेंगे आम
---------------------------------------
१३
खराब पर्यावरण से, धरती माँ थर्राय
असमय बरसात बरसे, धरती ताप बढ़ाय
--------------------- -------------------
१४
हुई करारी हार है, विरले समझी बात
पर्यावरण बचा रहे , दौड़े है दिन रात
----------------------------------------
१५
दूषित पर्यावरण से, परत में बढ़ा छेद
मानव है अब सिर चढ़ा, फेर करेगा खेद
------------- - ---------------------
१६
पर्यावरण शुद्ध रखे , ऐसा करे उपाय
पेड़ लगाए हम सभी, लोगो को समझाय
---------------------------------------
१७
जीव जंतु बेहाल है, इनका रखियो ध्यान
पर्यावरण शुद्ध रखे, बन जाए इंसान
--------------------------------- -------
१८
वट वृक्ष है देव समा, पूजो बारम्बार
पर्यावरण साफ रखें, ये जीवन आधार
---------------------------------------
१९
अंत निकट संसार का, सूख रहा है नीर
पर्यावरण दूषित है, कब जानोगे पीर
---------------------------------------
२०
कुदरत भी अनमोल है, इसका नहीं विकल्प
पर्यावरण शुद्ध रखे, सबका हो संकल्प
---------------------------------------
२१
कभी कहीं कांपै धरा , कभी कही भूचाल
दूषित पर्यावरण से, जीव जगत बेहाल
---------------------------------------
२२
पर्यावरण दूषित है, फिर क्यो है तू मौन
मानव अब खोल नयना, तुझे जगाये कौन
---------------------------------------
२३
प्रकृति का मीत बनके, करे ऐसा उपाय
भूमि को कर हरी भरी, पर्यावरण बचाय
---------------------------------------
२४
धरती हरी भरी रहे, ऐसा करें उपाय
कुछ कारज ऐसा करें, कुदरत भी बच जाय
---------------------------------------
२५
सांवरो मऊ जी कहे, गलत चल रहा दौर
पर्यावरण दूषित है, समय आ गया बौर
--------------------------------------
✍सांवर कुमावत'मऊ'✍

Monday, August 13, 2018

तीज का त्यौहार

---------तीज का त्यौहार----------
****************************
श्रावण शुक्ला तीज है, देती है संदेश ।।
भाईचारे से रहो, मन से त्यागो द्वेष ।।१।।

****************************
मीठा से मधुमेह हुआ, हमको रखा दरिद्र ।।
चिढ़ाते है बार बार, ये घेवर के छिद्र ।।२।।

****************************
मेहंदी लगा हाथ में, चुडिया हैं खनकाय ।।
सतरंगी लहरिया से , बदन बदन खिल जाय ।।३।।

****************************
प्यारी बदरा छा गयी, छुटन लागी फुहार ।।
हरियाली भी छा गयी, धरा करे सिंगार ।।४।।

****************************
झूलो की इस रूत में, झूल रही है नार ।।
मेले में ही तीज के, तुम भी आओ यार ।।५।।

*****************************
सजनी बोली प्रेम से, पर थोड़ा सा खीझ ।।
तुम बिन अब तो "साँवरे", खेले कैसे तीज।।६।।
*****************************

✍ साँवर कुमावत 'मऊ' ✍