Saturday, March 21, 2020

ये क्या हो गया

ये क्या हो गया इस शहर को
देखते ही देखते वीरान हो गया
जगमगाहट जिसकी बनी रहती थी
वो आज सूनसान हो गया ।
             ये क्या हो गया इस शहर को

जो कहलाता है गुलाबी नगरी
आज  बनी  है  बेरंग नगरी
वो चारदीवारी की चहचाहट भी
इस महामारी के आगे है हारी ।
             ये क्या हो गया इस शहर को

चलते थे अनगिनत वाहन यहाँ
शोर शराबा होता था रोज
कभी ऐसा तो न था मेरा शहर
देखकर अब तो आता है रो'ज ।
             ये क्या हो गया इस शहर को

भविष्य का अंजाम सोच कर
घर मे दुबक कर बैठे हैं लोग
मिलना जुलना सब बन्द हुआ
आया  है  ये  कैसा  रोग ।
             ये क्या हो गया इस शहर को

देखा मैंने मेरी आँखों से
जैसे ग्रहण में डूबा हो शहर
बेजान नजर आती है गालियां
बेचारी पुलिस खड़ी है बाहर ।
             ये क्या हो गया इस शहर को
🖋️साँवर कुमावत 'मऊ'🖋️

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