Sunday, March 29, 2020

म्हारो मुरधर देस

भूरा भूरा धोरियाँ, सोने जैड़ी रेत ।
धवळ अठै रो मानखो, राखे सबसूं हेत ।। 1

तीखो पड़े तावडियो, धोरां वाळा देस ।
बैठ गौरी पांगळ पर, खुसी होय हमेस ।। 2

मुरधर म्हारा देस में, धोरां रा है खेत ।
गरमी री इण टैम में, उड़ै रेत री रेत ।। 3

सोना जैड़ी रेत है, मुरधर री है शान ।
भलो अठै रौ मानखो, घणो बढ़ायो मान ।। 4

लुवां चालै जोरां री, मुरधर रै इण देस ।
नही दिखे है रुंखड़ा, कठै करां इब ऐस ।। 5

लुवां चाले जोरां री, हिड़दौ देवै चीर ।
बेगा आवो बालमा, मर जासी या हीर ।। 6

डगरौ चाले डगामग, मारुस्थल रै मायं ।
घुमण आया सैलाणी, घणी मौज कर जाय ।। 7

मुरधर म्हारा देस में, खेजड़ली री छांव ।
गैला चलता राहगीर, बैठ्या इण री छांव ।। 8

तातो तातो तावडो, मुरधर री पहचाण  ।
लुवां चले जोरां री, लेवै सबका प्राण ।। 9

बालू हाळी रेत में, नही दिखे है रुंख ।
छाया भी दिखे कोन्या, पाणी गयो'र सूख ।। 10

सैलाणी भी आव के, करै है अठै ऐस ।
'साँवर मऊ' जी कैवै, पधारो म्हा'र देस ।। 11
🖋️साँवर कुमावत मऊ🖋️


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