कृष्ण की वाणी राधा
कृष्ण की राणी राधा
कृष्ण की मोहिनी राधा
कृष्ण की सहचारिणी राधा
कृष्ण धाम में राधा
कृष्ण वाम में राधा
कृष्ण जाम में राधा
कृष्ण काम मे राधा
कृष्ण आँख में राधा
कृष्ण मोरपांख में राधा
कृष्ण काँख में राधा
कृष्ण नाम की राख में राधा
कृष्ण का रोम रोम राधा
कृष्ण का अंग अंग राधा
कृष्ण का नाम नाम राधा
कृष्ण का सर्वस्व राधा
कृष्ण की बांसुरी राधा
कृष्ण की मुस्कान राधा
कृष्ण की हर श्वास राधा
कृष्ण की हर गोपी राधा
कृष्ण प्रेम का नाम राधा
कृष्ण का संसार राधा
कृष्ण जग की रज में राधा
राधा हैं कृष्ण, कृष्ण हैं राधा ।। 1 ।।
कृष्ण आत्मा कृष्ण परमात्मा कृष्ण ही सर्वेश्वर हैं ।
कृष्ण देवता कृष्ण मानव कृष्ण ही परमेश्वर हैं ।।
कृष्ण कर्म कृष्ण भाग्य कृष्ण ही पुरुषार्थ है ।
कृष्ण अर्थ कृष्ण शब्द कृष्ण ही परमार्थ हैं ।।
कृष्ण माया कृष्ण काया कृष्ण ही सुक्ष्म ज्ञान हैं ।
कृष्ण भगति कृष्ण चिंतन कृष्ण ही विज्ञान हैं ।।
कृष्ण प्रेम कृष्ण स्नेह कृष्ण ही अनुराग हैं ।
कृष्ण विटप कृष्ण फूल कृष्ण ही पराग हैं ।।
कृष्ण ह्रदय कृष्ण बुद्धि कृष्ण ही मन विभोर हैं ।
कृष्ण स्थिर कृष्ण जंगम कृष्ण ही शाम भोर हैं ।।
कृष्ण यह कृष्ण वह कृष्ण ही नश्वर हैं ।
कृष्ण मैं कृष्ण तुम कृष्ण ही पावर हैं ।। 2 ।।
प्रफुल्लित हो मन
अपने साँवरे का
गुणगान कर रहा
साँवली सूरत पर
वो मोहित हो रहा
बसाके दिल में छवि
उसकी अलबेली
साँवरे मन मगन
श्रीराधे राधे जप रहा
सुना है तुम्हारे
बारे में साँवरे कि
भक्तो के ह्रदय
की बात पल में
सुन लेता है तू
आओ कभी साँवरे
मेरे दिल मे भी
ये कब से
तेरे गुण गा रहा है
कब से मेरा दिल
कान्हा कान्हा पुकार रहा ।। 3 ।।
तुम आओगे मेरे घर यार कब तक
हम करेंगे तुम्हारा इंतजार कब तक
आंखे पथरा गयी दीदार होगा कब तक
आखिर मेरा द्वार सुना रहेगा कब तक
नशा छाया तेरे ही नाम का अब तो
दिल ये मेरा बीमार रहेगा कब तक
हे मनवा साँवरा मेरा आता ही होगा
करेंगे वो रुखा व्यवहार कब तक ।। 4 ।।
मैं दीवाना हूँ श्याम, तेरे दर्शन चाहिए ।
करूँ मैं तेरी चाकरी,ऐसा जीवन चाहिए ।
सुबह शाम तेरा स्मरण करूँ, ऐसी यादास्त चाहिए ।
खो न जायें याद तेरी, ऐसा साथ चाहिए ।
आऊँ वृंदावन धाम मैं, ऐसा सौभाग्य चाहिए ।
इस नश्वर जगत में, तेरा साथ चाहिए ।
कुछ नही लालसा बस, तेरा नाम चाहिए ।
बस जायें सांसो में नाम तेरा, इतनी कृपा चाहिए ।
भव सागर को तारने में, तुम सा मांझी चाहिए ।
साँवरो करे विनती, हर जन्म में तुम्हारे चरण चाहिए ।। 5 ।।
पीताम्बर धारी एक ग्वाला रे
वह यमुना किनारे वाला रे
गोप ग्वालों का रखवाला रे
वो इस बृज का लल्ला रे
घनघोर अंधेरी रात में जन्मा रे
वह नटखट नंदलाला कान्हा रे
मोर मुकुट सिर पर धारे रे
दुष्टों को वो नितगी मारे रे
माखन चोर यशोदा लल्ला रे
किया भक्तो का भला रे ।। 6 ।।
ख्वाहिश मेरी इतनी सी
हर पल मेरे संग रहना
बीच भवर में डोले मेरी कश्ती
मांझी बनकर उसे थाम लेना
'साँवरे' तेरे दर का भिखारी
ये साँवरा तेरा गुलाम हो जाये
सुहानी उसकी हर
सुबह शाम हो जाये ।। 7 ।।
मन मन्दिर से उठी हिलोरें
कब जाओगे वृंदावन प्यारे
बृज धाम का रज रज गाये
श्री राधे राधे नाम सुनायें
वृंदावन में कान्हा रास रचाये
प्रेम भरी वो बाँसुरी बजाये
राधा संग जब नाचे साँवरियां
देख रूप को हो गया बावरिया
चलो अब तो उस वृंदावन प्यारे ।। 8 ।।
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