पर्यावरण पच्चीसी
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१
विघ्न हरण विनायक जी, देना ज्ञान अपार
पर्यावरण पर लिखता, करना बेड़ा पार
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२
पर्यावरण मलिन करे, तनिक न आती लाज
रे मानव तू है बना, दैत्यों का सरताज
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३
कूके कोयल बाग में, नाचे उपवन मोर
मनभावन पर्यावरण, आज बना चितचोर
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४
पर्यावरण बचाइये, धरती करे पुकार
पेड़ लगाकर कीजिए, धरती का श्रृंगार
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५
मशीनरी जब से बनी, जीवन का आधार
तबसे पर्यावरण की, हुई करारी हार
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६
जब साल में एक दिवा, करते जय जयकार
पर्यावरण दिवस कहाँ, होगा फिर साकार
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७
षट ऋतु बारह मास है, गरम शरद बरसात
साफ पर्यावरण रहे, सुबह शाम दिन रात
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८
दूषित पर्यावरण से, सभी जीव बेहाल
मानव ने गंदा किया, जीना हुआ मुहाल
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९
शुद्धी पर्यावरण से, शुद्ध मिलेगा अन्न
काया तरपत हो गयी, हरख जायेगा मन
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१०
मलिन पर्यावरण देख, तडपता सृष्टिकार
गाँधीजी के स्वप्न को, अभी करो साकार
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११
कर दे मानव जिंदगी, सब कुदरत के नाम
पेड़ों पौधों पर लिखें, प्यार भरा पैगाम
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१२
तन मन धन कुर्बा करो, कुदरत के ही नाम
खूब लगाओ तरु लता, खूब लगेंगे आम
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१३
खराब पर्यावरण से, धरती माँ थर्राय
असमय बरसात बरसे, धरती ताप बढ़ाय
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१४
हुई करारी हार है, विरले समझी बात
पर्यावरण बचा रहे , दौड़े है दिन रात
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१५
दूषित पर्यावरण से, परत में बढ़ा छेद
मानव है अब सिर चढ़ा, फेर करेगा खेद
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१६
पर्यावरण शुद्ध रखे , ऐसा करे उपाय
पेड़ लगाए हम सभी, लोगो को समझाय
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१७
जीव जंतु बेहाल है, इनका रखियो ध्यान
पर्यावरण शुद्ध रखे, बन जाए इंसान
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१८
वट वृक्ष है देव समा, पूजो बारम्बार
पर्यावरण साफ रखें, ये जीवन आधार
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१९
अंत निकट संसार का, सूख रहा है नीर
पर्यावरण दूषित है, कब जानोगे पीर
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२०
कुदरत भी अनमोल है, इसका नहीं विकल्प
पर्यावरण शुद्ध रखे, सबका हो संकल्प
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२१
कभी कहीं कांपै धरा , कभी कही भूचाल
दूषित पर्यावरण से, जीव जगत बेहाल
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२२
पर्यावरण दूषित है, फिर क्यो है तू मौन
मानव अब खोल नयना, तुझे जगाये कौन
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२३
प्रकृति का मीत बनके, करे ऐसा उपाय
भूमि को कर हरी भरी, पर्यावरण बचाय
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२४
धरती हरी भरी रहे, ऐसा करें उपाय
कुछ कारज ऐसा करें, कुदरत भी बच जाय
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२५
सांवरो मऊ जी कहे, गलत चल रहा दौर
पर्यावरण दूषित है, समय आ गया बौर
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✍सांवर कुमावत'मऊ'✍
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१
विघ्न हरण विनायक जी, देना ज्ञान अपार
पर्यावरण पर लिखता, करना बेड़ा पार
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२
पर्यावरण मलिन करे, तनिक न आती लाज
रे मानव तू है बना, दैत्यों का सरताज
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३
कूके कोयल बाग में, नाचे उपवन मोर
मनभावन पर्यावरण, आज बना चितचोर
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४
पर्यावरण बचाइये, धरती करे पुकार
पेड़ लगाकर कीजिए, धरती का श्रृंगार
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५
मशीनरी जब से बनी, जीवन का आधार
तबसे पर्यावरण की, हुई करारी हार
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६
जब साल में एक दिवा, करते जय जयकार
पर्यावरण दिवस कहाँ, होगा फिर साकार
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७
षट ऋतु बारह मास है, गरम शरद बरसात
साफ पर्यावरण रहे, सुबह शाम दिन रात
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८
दूषित पर्यावरण से, सभी जीव बेहाल
मानव ने गंदा किया, जीना हुआ मुहाल
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९
शुद्धी पर्यावरण से, शुद्ध मिलेगा अन्न
काया तरपत हो गयी, हरख जायेगा मन
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१०
मलिन पर्यावरण देख, तडपता सृष्टिकार
गाँधीजी के स्वप्न को, अभी करो साकार
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११
कर दे मानव जिंदगी, सब कुदरत के नाम
पेड़ों पौधों पर लिखें, प्यार भरा पैगाम
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१२
तन मन धन कुर्बा करो, कुदरत के ही नाम
खूब लगाओ तरु लता, खूब लगेंगे आम
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१३
खराब पर्यावरण से, धरती माँ थर्राय
असमय बरसात बरसे, धरती ताप बढ़ाय
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१४
हुई करारी हार है, विरले समझी बात
पर्यावरण बचा रहे , दौड़े है दिन रात
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१५
दूषित पर्यावरण से, परत में बढ़ा छेद
मानव है अब सिर चढ़ा, फेर करेगा खेद
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१६
पर्यावरण शुद्ध रखे , ऐसा करे उपाय
पेड़ लगाए हम सभी, लोगो को समझाय
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१७
जीव जंतु बेहाल है, इनका रखियो ध्यान
पर्यावरण शुद्ध रखे, बन जाए इंसान
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१८
वट वृक्ष है देव समा, पूजो बारम्बार
पर्यावरण साफ रखें, ये जीवन आधार
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१९
अंत निकट संसार का, सूख रहा है नीर
पर्यावरण दूषित है, कब जानोगे पीर
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२०
कुदरत भी अनमोल है, इसका नहीं विकल्प
पर्यावरण शुद्ध रखे, सबका हो संकल्प
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२१
कभी कहीं कांपै धरा , कभी कही भूचाल
दूषित पर्यावरण से, जीव जगत बेहाल
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२२
पर्यावरण दूषित है, फिर क्यो है तू मौन
मानव अब खोल नयना, तुझे जगाये कौन
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२३
प्रकृति का मीत बनके, करे ऐसा उपाय
भूमि को कर हरी भरी, पर्यावरण बचाय
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२४
धरती हरी भरी रहे, ऐसा करें उपाय
कुछ कारज ऐसा करें, कुदरत भी बच जाय
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२५
सांवरो मऊ जी कहे, गलत चल रहा दौर
पर्यावरण दूषित है, समय आ गया बौर
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✍सांवर कुमावत'मऊ'✍
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