---------तीज का त्यौहार----------
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श्रावण शुक्ला तीज है, देती है संदेश ।।
भाईचारे से रहो, मन से त्यागो द्वेष ।।१।।
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मीठा से मधुमेह हुआ, हमको रखा दरिद्र ।।
चिढ़ाते है बार बार, ये घेवर के छिद्र ।।२।।
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मेहंदी लगा हाथ में, चुडिया हैं खनकाय ।।
सतरंगी लहरिया से , बदन बदन खिल जाय ।।३।।
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प्यारी बदरा छा गयी, छुटन लागी फुहार ।।
हरियाली भी छा गयी, धरा करे सिंगार ।।४।।
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झूलो की इस रूत में, झूल रही है नार ।।
मेले में ही तीज के, तुम भी आओ यार ।।५।।
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सजनी बोली प्रेम से, पर थोड़ा सा खीझ ।।
तुम बिन अब तो "साँवरे", खेले कैसे तीज।।६।।
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✍ साँवर कुमावत 'मऊ' ✍
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